Wednesday, April 8, 2009

पीड़ा.



"सच हम नही,
सच तुम नही,
सच है महज संघर्ष ही।
संघर्ष से हट कर जिए तो क्या जिए या हम की तुम।
जो नत हुआ वो मृत हुआ जो वृंत से झड़ कर कुसुम॥"


यू ही सिमट के रह जाने की पीड़ा तो पूछो बूंदों से,

बिन सीमा के बह जाने की पीड़ा तो पूछो सागर से।
कुछ घंटो तक ही जल पाने की पीड़ा तो पूछो दीपक से,
कभी न बुझना, जल-जलते जाना, यह पीड़ा तो पूछो सूरज से।

बिन चमक के रह जाने की पीड़ा तो पूछो पत्थर से,

चमक के कारण कट-कट जाने की पीड़ा तो पूछो हीरे से।
हवा के झोके के साथ, न जाने कहाँ ही बह जाने की पीड़ा तो पूछो सूखे पत्तो से,
बस एक जगह ही बस जाने की पीड़ा तो पूछो उस पत्ते के पौधे से।

कितने ही भवरों को मधु लुटा देने की पीड़ा तो पूछो कुसुमों से,
"कहीं तो होगा मतवाला!", इस इंतज़ार की पीड़ा तो पूछो मधुशाला से।
जो मोहब्बत के नाम पे मिट गया, जिसका लैला से रिश्ता टूट गया,
मोहब्बत में बिक जाने की पीड़ा तो पूछो उस प्रेमी से।
न प्यार हो जिसको कभी मिला, न प्यार हो जिसने कभी किया,
नफरत की पीड़ा तो पूछो उस माही से।।


हर कोई पीड़ा में जूझ गया, पीड़ा में वह बिन बोल गया।
भूमंडल के इस खेल में, जो न जीता वो हार गया।
जीत उसी की जिसने पीड़ा में सुख को ढूँढ लिया,
मौत के मुँह में भी जाकर, मुस्कुराना जिसने सीख लिया।
पीड़ा से जो जितनी तेज़ है भागा, कठिन रहा उसका उतना ही रास्ता।
 पलट के पीड़ा को चूम ले, हर एक गम में भी तू झूम ले।

जो साथ फूलों के चला, जो ढाल पाते ही ढले,
वो जिंदगी क्या जिंदगी जो सिर्फ़ पानी सी बही।
ह्रदय में अपने सच खोजना सीख ले,
अपने नयन के आसुओं को स्वयं पोछना सीख ले॥









6 comments:

  1. nice blog...very creative and innovative...keep it up...........SHEKHAR RAYCHAUDHURY(MUMBAI)

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  2. ;)thanks shekhar! keep visiting. looking forward to ur page..

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  3. oh shit tuhina..!! i mean... i nvr thought u cud write hindi so fabulously..!! yaar.. im impressed..!! lol.. nice ..!! :D..

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  4. hi richie.. :)
    thanks a lot. perhaps i will write hindi more often than i do. :P

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  5. hey dear DOSt u such a wonderfull writing allrounder keep doing interesting writing i like the way u write ur thoughts....i love to read ur blog its diffrent....and yes plz welcome to my blog yaar i hope u like it....??

    Jai Ho mangalmay HO

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  6. A master in English you were I knew, then why does amazing hindi come as a surprise!
    Amazing words... a larger than life philosophy.... together, an outstanding read.

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