"शायद मेरी मोहब्बत के सागर से कई गुनाह कीमती है,
तुम्हारा एक घूँट अभिमान |"
टंगी हुई है तस्वीर तुम्हारी,
मेरे कमरे की सामने वाली दीवार पर |
चाँद-से रोशन सूरत पे तुम्हारी एक,
मंद मगर नटखट-सी मुस्कुराहट है |
छुपाते भी छुपती नहीं है,
तुम्हारी चमकीली आँखों में भरी मस्ती |
मगर उनकी नमी में चुटकी-भर का भोलापन ज़रूर है |
देख, ऐसा लगता है मानो अगले ही पल,
तुमने छोड़ी होगी, एक ठहाकेदार हंसी |
देखती हूँ तुम्हें उस तस्वीर में तो मालूम पड़ता है कि,
शुरुआत चाहत की अनजान होती है, न कोई अंत होता है |
बेहद हो गई है मेरी यह मोहब्बत तुम्हारे लिए |
कहीं मुझे बावला न कर दे!
पर, बीते हुए मौसम में ही,
हवा की तरह आया था तुम्हारे अभिमान का झोंका |
हल्का तो था नहीं, जो
हिला दी है उसने यह तस्वीर तुम्हारी |
दीवार पर टंगी तसवीरें तिरछी अच्छी नहीं लगती |
कल रात की बारिश अपनी भीगी उंगलियों से,
लिख गई है एक संदेशा, मेरी कांच की खिड़की पर |
"नहीं चुका सकते कीमत तुम्हारी मोहब्बत का |
बहुत सताती है हमें यह, उधारी हमारी |"
संग अपने लायी थी तूफ़ान भी, वह भीगी बारिश,
जो दो पल में गूँज, कानों में मेरे, चला गया,
फैसला तुम्हारा-
"पास से तो हम दूर भला"
मालूम है मुझे, यह आवाज़ तुम्हारी नहीं,
अभिमान की है तुम्हारे |
कूट-कूट के समा गया है रग-रग में जो तुम्हारे...
...जो ला रहा है प्यार के बीच हमारे, सीलन-सी |
सीलन तो पक्की दीवारों को भी गला देती है |
काश ऐसा हो जाए की बूंदों की परियां,
चला दे कोई ऐसा जादू ,
जिस-से धूल के साथ-साथ मिट जाएँ,
मेरे हांथों से तुम्हारे नाम की लकीरें |
शायद वह कभी थी ही नहीं |
मिट जाएँगी जब ये लकीरें हाथों से,
तो दिल भी न होगा मतवाला, नाम पर तुम्हारे |
हो सकता है, पड़ जाए कीमती मेरा प्यार तुम्हें,
पर तुम्हारे अभिमान की कीमत तो अनमोल है!
तुम्हारे प्यार की सुलगती आग पे यूँ,
इस तरह पानी फ़ेरने में, दर्द तो बहुत होगा,
तो ये ही बतला के समझा लेंगे अपने आप को,
की तुमसे हमने सिर्फ मोहब्बत की थी, कोई सौदा तो नहीं था |
क्या हुआ, बेहद हो भी गयी तो ?



Bohot sundar...... mesmerizing.
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ReplyDeleteBeautiful!
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